गलत फैसला न लें, पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर किसी की मदद करने से पहले 6 बातों का ध्यान रखें
एली वोल्पे. कोरोना कादौर शुरू होने से पहले हम एक-दूसरे की मदद करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं थे, लेकिन अभी के हालात हमें ऐसा करने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। किसी की भी मदद करने पर सवाल नहीं उठते थे, लेकिन अब सुरक्षा, संक्रमण जैसे कई बातें हमारी दिमाग में चलती रहती हैं। ऐसे में किसी की तरफ मदद का हाथ बढ़ाने से पहले सभी जोखिमों को समझ लें,ताकि आप बेहतर फैसला ले पाएं।
पर्सनल और प्रोफेशनल तौर पर किसी की मदद करने से पहले 6 बातों पर ध्यान दें-
1- निजी जोखिम को लेकर विचार करें
- महामारी के दौरान हममें से कई दूसरों की जरूरत पड़ने पर मदद करना चाहते हैं। हालांकि सभी मददबिना जोखिम के नहीं आतीं। पहले किसी कार्यक्रम के प्लानिंग की रिक्वेस्ट को आप तुरंत हां कर देते, लेकिन अब इसके लिए काफी सोचने की जरूरत है। कई सवाल उठते हैं, जैसे- कार्यक्रम होस्ट करने में मदद करने पर आप कई लोगों से मुलाकात करेंगे।
- कॉर्नेल में ऑर्गनाइजेशनल बिहेवियर की एसोसिएट प्रोफेसर वेनेसा बोन्स के मुताबिक, इस तरह के हालातन कहने कोमुश्किल बना देते हैं,क्योंकि न कहने पर हम दरअसल दूसरे व्यक्ति से यह कह रहे हैं कि वो पूछकरउन्होंने गलती की है। वेनेसा एक स्क्रिप्ट तैयार करने की सलाह देती हैं, जिसमें यह लिखा होगा कि आप ज्यादा जोखिम वाली मांग को कैसे मना करेंगे।
2- टाल दें और विचार करें
- यह सोचें कि आप कितनी बार अनुरोधों पर सहतमि जता देते हैं, बिना यह जाने कि मांग क्या रखी गई है। रिसर्च बताती है कि हम बिना दिमाग लगाए मदद करने के लिए हां कर देते हैं, क्योंकि हम ऑटोपायलट मोड पर होते हैं।
- लोगों का बात करने का तरीका अलग-अलग होता है। एक व्यक्ति जो मदद के लिए सीधी याचिका देता है, वो मदद के लिए किसी से रिक्वेस्ट नहीं करेगा। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में लिंगुइस्टिक्स की प्रोफेसर डेबरा टेनन के मुताबिक, ऐसे में किसी फेवर के नेचर को जानने के लिए समय लेना बहुत जरूरी है।
- जब भी कोई मदद की मांग करता है तो नेचर पर विचार करना आसान होता है। डॉक्टर वेनेसा कहती हैं कि पूछे जाने में ऐसे भी काफी दबाव होता है, इससे फर्क नहीं पड़ता कि कितनी सभ्यता से पूछा गया है। कुछ भी हो मदद करने की चाह के चलते कोई गलत फैसला न लें। डॉक्टर वेनेसा ने कहा कि अपने आप को समय देने के लिए आप मदद मांगने वाले से ईमेल पर डीटेल्स मांग सकते हैं या यह कह सकते हैं कि आपको पहले अपना शेड्यूल देखना होगा।
3- मदद करने से पहले चीजों का आकलन करें
- सोशल साइकोलॉजिस्ट सुजैन न्यूमैन कहती हैं कि कई लोग होते हैं जो मदद करना चाहते हैं और उनकी सोच साफ होती है। ऐसे में यह विचार करना जरूरी हो जाता है कि आपके पास काम को पूरा करने के लिए समय और मानसिक तैयारी है या नहीं।
- अगर कोई साथी आपसे जूम प्रेजेंटेशन को देखने के लिए कहता है तो पहले उन चीजों के बारे में विचार कर लें जो आपको छोड़नी होंगी। क्या आपको मीटिंग रीशेड्यूल करनी होगीं? आप कौन से दूसरे फेवर्स को पूरा कर रहे हैं जिनमें आप व्यस्त हैं? डॉक्टर न्यूमैन कहती हैं कि सवाल उठता है- "इसमें मेरे लिए क्या है?"
- उन्होंने कहा कि हो सकता है सुनने में यह स्वार्थी लगे, लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आप पहले से हां किए हुए कामों के कारण परेशान हैं तो आप अपने जीवन से अपना कंट्रोल खो देंगे। आपके पास आराम करने या खुद की देखभाल के लिए समय नहीं होगा।
4- रिश्ते पर विचार करें
- मदद मांगना नजदीकी बढ़ाने के लिए दिखाया जाता है। रिसर्च बताती है कि हम किसी अजनबी की भी वैसे ही मदद करेंगे, जैसे अपने करीबी दोस्त की। ऐसे में हो सकता है कि दूर बैठे किसी साथी का सवाल गलत नहीं लगे।
- डॉक्टर टेनन का कहना हैकि यहां कुछ है जो करीब होने के लिए कहा जाना चाहिए, क्योंकि उनके पास लिटरेरी एजेंट्स की कई रिक्वेस्ट आती हैं, लेकिन उन्होंने बताया कि वो अपना समय उन्हीं करीबी दोस्तों और लेखकों को देती हैं जिनका काम उन्हें पसंद है।
- कोमकास्ट वेंचर्स में मैनेजिंग डायरेक्टर और "पैशन एंड पर्पज: स्टोरीज फ्रॉम द बेस्ट एंड ब्राइटेस्ट यंग बिजनेस लीडर्स" के लेखक डैनियल गुलाती के अनुसार, पेशेवर तौर पर हमें किसी रिक्वेस्ट को मना करने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। यह हमारी करियर पर असर डाल सकता है।
- उन्होंने कहा "जिसे आप आज जूनियर के तौर पर देख रहे हैं वो हो सकता है कि आपकी भविष्य की कंपनी का को फाउंडर हो। किसी की वरिष्ठता के आधार पर रिक्वेस्ट्स को ज्यादा फिल्टर करना बहुत ही छोटा नजरिया होता है।"
5- उद्देश्य तय करें
- डॉक्टर न्यूमैन कहती हैं कि किसी के मदद मांगने पर आश्चर्य करने के बजाए खुद से पूछें कि हां करने के लिए आपको क्या प्रोत्साहित कर रहा है। क्या टकराव और असहज बातचीत का डरआपको लगातार बात मानने पर मजबूर कर रहा है? इस बात पर सोचने के बजाए कि "उसने मुझसे मदद क्यों मांगी" इस बात को जानें कि आप सहमति क्यों दे रहे हैं।
- मदद या पूछने को लेकर हमारे आपसी बातचीत का संघर्ष इस बात को प्रभावित कर सकता है कि लोग हमें कैसे देख रहे हैं। वे हमें समहति देने के लिए तैयार कर सकते हैं। बेन फ्रैंक्लिन प्रभाव बताता है कि जब हम लोगों से मदद मांगेंगे तो वे हमें और ज्यादा पसंद करेंगे। 2014 में जर्नल ऑफ सोशल साइकोलॉजी में प्रकाशित एक स्टडी इस थ्योरी का समर्थन करती है। इसमें बताया गया है कि लोग उसके व्यक्ति के प्रति ज्यादा नजदीकी महसूस करते हैं, जो उनसे मदद मांगता है।
- डॉक्टर न्यूमैन कहती हैं कि अगर ग्लानी आपको प्रोत्साहित करती है तो शायद मना करना बेहतर है। किसी भी नकारात्मक भावनाओं को सरलता से मना कर दें, क्योंकि अनुरोध करने वाला शायद ही कभी यह सोचे की आपने उन्हें मना क्यों कर दिया। उन्होंने कहा कि "जब आप मना करते हैं तो लोग आपके बारे में नहीं सोचते, आपकी उतनी चिंता नहीं करते, जितनी आप इस बात की चिंता करते हो कि वो क्या सोचेंगे।"
6- भविष्य के बारे में सोचें
- डॉक्टर वेनेसा कहती हैं कि जब हम दूर भविष्य में किसी मदद के लिए सहमत होते हैं तो हम वास्तव में इस तरह से नहीं देखते कि हमें कभी यह करना होगा। उन्होंने बताया कि जब वो काम करने की नौबत आती है तो हम विचार करते हैं कि काश मुझे ऐसा नहीं करना होता। जब हम भविष्य के बारे में सोचते हैं तो मदद बहुत ही आसान सी चीज लगती है।
- अगर आप किसी फेवर के लिए हां कह देते हैं तो जरूरी नहीं कि आपको वह काम करना ही हो। डॉक्टर टेनन कहती हैं कि "यह केवल तथ्य है कि आपने कहा था आप कर सकोगे, लेकिन आपने इसके बारे में सोचा और पाया कि आप इस काम को करने में सहज नहीं हैं।" उन्होंने कहा "इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपना पक्ष नहीं बदल सकते।"
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