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लाइफ इंश्योरेंस में नशे और एडवेंचर स्पोर्ट्स सहित इन 6 वजहों से मृत्यु होने पर नहीं मिलता क्लेम

लोग अपने परिवार को वित्तीय सुरक्षा देने के लिए टर्म प्लान लेते हैं। लेकिन टर्म लाइफ इंश्योरेंस लेने से पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि इसमें हर तरह की मृत्यु कवर नहीं होती। क्लेम का पैसा तभी मिलता है, जब पॉलिसीधारक की मृत्यु टर्म प्लान के तहत कवर होने वाली वजहों के चलते हुई हो। अगर मौत ऐसे किसी कारण से हुई है, जो प्लान में कवर नहीं होता तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है। और आपके परिवार को इंश्योरेंस का पैसा नहीं मिलेगा।

इन कारणों से मृत्यु होने पर मिलता है कवर


नेचुरल डेथ
टर्म इंश्योरेंस में प्राकृतिक मृत्यु या स्वास्थ्य कारणों से होने वाली मृत्यु कवर होती है। गंभीर बीमारी से हुई मृत्यु पर भी आपको इंश्योरेंस कवर का पैसा मिलता है।


एक्सीडेंट
टर्म प्लान लेने वाले की एक्सीडेंट में मृत्यु भी पॉलिसी के तहत कवर होती है। एक्सीडेंट में तुरंत मृत्यु के अलावा गंभीर रूप से घायल होने और बाद में मृत्यु होने पर भी कवरेज मिलता है। लेकिन नशे की हालत में ड्राइविंग के दौरान एक्सीडेंट में मृत्यु पर क्लेम नहीं मिलेगा। एक्सीडेंटल डेथ में घर या फैक्ट्री में काम करते समय दुर्घटना में मृत्यु होने पर, छत से गिर जाना, अचानक आग लगना और नदी में डूबना आदि।


आत्महत्या
इंश्योरेंस रेगुलेटर इरडा ने जीवन बीमा के तहत आत्महत्या के क्लॉज में 1 जनवरी 2014 से बदलाव किए हैं। इसके अनुसार अगर पॉलिसीधारक टर्म प्लान लेने के एक साल के अंदर आत्महत्या कर लेता है तो लिंक्ड प्लान (यूलिप) के मामले में नॉमिनी 100 फीसदी पॉलिसी फंड वैल्यू पाने का हकदार है। वहीं नॉन-लिंक्ड प्लान के मामले में नॉमिनी को भुगतान किए गए प्रीमियम की 80 फीसदी राशि मिलेगी।


इन कारणों से हुई है मृत्यु तो नहीं मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम का पैसा


नशे की वजह से मृत्यु
अगर टर्म पॉलिसी लेने वाला शराब के नशे में ड्राइव कर रहा हो या उसने ड्रग्स लिया हो तो इस स्थिति में मृत्यु होने की स्थिति में बीमा कंपनी टर्म प्लान की क्लेम राशि देने से इंकार कर सकती है। इसके अलावा ड्रग्स या शराब के ओवरडोज से मृत्यु के मामले में भी क्लेम रिजेक्ट हो जाता है।


पॉलिसीधारक की हत्या
पॉलिसीधारक की हत्या हो जाए और उसमें नॉमिनी का हाथ हो या उस पर हत्या का आरोप हो। ऐसे में क्लेम रिक्वेस्ट तक तक होल्ड पर रहेगी, जब तक नॉमिनी को क्लीन चिट नहीं मिल जाती यानी वह निर्दोष साबित नहीं हो जाता। इसके अलावा पॉलिसीधारक के किसी आपराधिक गतिविधि में लिप्त रहने पर उसकी हत्या होने पर भी बीमा की रकम नहीं मिलेगी।


खुद को नुकसान पहुंचाना
अगर पॉलिसीधारक को एडवेंचर स्पोर्ट्स का शौख है और उसकी मृत्यु किसी खतरनाक गतिविधि को करते हुए हुई है तो बीमा कंपनी टर्म प्लान के क्लेम को रिजेक्ट कर देगी। इसमें कार या बाइक रेस, स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, पैरा ग्लाइडिंग और बंजी जंपिंग आदि से मृत्यु शामिल होती है।


किसी पुरानी बीमारी की वजह से मृत्यु
अगर टर्म पॉलिसी लेने से पहले से व्यक्ति को कोई बीमारी है और उसने पॉलिसी लेते हुए इसकी जानकारी बीमा कंपनी को नहीं दी तो उस बीमारी से मौत होने पर बीमा कंपनी क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। इसके अलावा HIV/AIDS से हुई मृत्यु भी टर्म इंश्योरेंस में कवर नहीं होती है।


प्राकृतिक आपदा से मौत
अगर किसी पॉलिसीधारक की मौत प्राकृतिक आपदा जैसे कि भूकंप या फिर तूफान आदि से होती है तो नॉमिनी को इश्योरेंस क्लेम नहीं दिया जाता।

बच्चे के जन्म के वक्त मौत
अगर पॉलिसीधारक की मौत बच्चे को जन्म देते वक्त किसी वजह से हो जाती है तो इस स्थिति में नॉमिनी को मुआवजा नहीं मिलता। आम टर्म पॉलिसी में बच्चे पैदा होते वक्त किसी गड़बड़ी की वजह से होने वाली मृत्यु कवर नहीं की जाती।


टर्म इंश्योरेंस क्या है?
टर्म इंश्योरेंस एक तरह की जीवन बीमा पॉलिसी है जो सीमित अवधि के लिए निश्चित भुगतान दर पर कवरेज प्रदान करती है। यदि पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो मृत्यु लाभ राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है। यह अनिश्चितता या मृत्यु की स्थिति में परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।



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क्लेम का पैसा तभी मिलता है, जब पॉलिसीधारक की मृत्यु टर्म प्लान के तहत कवर होने वाली वजहों के चलते हुई हो


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