Breaking News

भविष्य पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब द्वारा बनवाए सूर्य मंदिरों में एक है कोणार्क का वैवास्वान मंदिर

17 अगस्त सोमवार को सिंह संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव अपनी ही राशि सिंह में प्रवेश करेंगे। इस संक्रांति पर्व पर सूर्य पूजा का खास महत्व है। सूर्य वैदिक देवता हैं। देश में वैदिक काल से ही भगवान सूर्य की पूजा हो रही है। ग्रंथों के अनुसार भगवान कृष्ण और जाम्बवती के पुत्र साम्ब ने 12 सालों तक भगवान सूर्य की तपस्या की। इसके बाद उन्होंने कई सूर्य मंदिरों का निर्माण किया था। समय के साथ-साथ उनमें से कुछ मंदिर पूरी तरह खत्म हो गए और का जिर्णोद्धार भी हुआ है। देश में कई ऐसे सूर्य मंदिर हैं जो हजारों साल पुराने हैं और आज भी मौजूद हैं। इनमें उड़ीसा सहित गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, कश्मीर और उत्तरप्रदेश के सूर्य मंदिर खास हैं। देश के इन सूर्य मंदिरों का इतिहास बहुत पुराना है। जानिए देश के खास सूर्य मंदिरों के बारे में।

उड़ीसा का सूर्य मंदिर
भविष्य पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने कई सूर्य मंदिर बनवाए थे। उनमें कोणार्क का सूर्य मंदिर भी है। वहीं कुछ इतिहासकारों का मानना है कि पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंह देव प्रथम ने इस सूर्य मंदिर को तेरहवीं शताब्दी में बनवाया था। प्राचीन ओडिया स्थापत्य कला का यह मंदिर बेजोड़ उदाहरण है। सूर्य मंदिर की रचना इस तरह से की गई है कि यह सभी को आकर्षित करती है। सूर्य को ऊर्जा, जीवन और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। इस मुख्य मंदिर की संरचना के बारे में कहा जाता है कि उसके गर्भगृह में सूर्यदेव की मूर्ति ऊपर व नीचे चुम्बकीय प्रभाव के कारण हवा में दोलित होती थी। प्रात: सूर्य की किरणें रंगशाला से होते हुए वर्तमान में मौजूद गर्भगृह के सामने के हिस्से से होते हुए कुछ देर के लिए गर्भगृह में स्थित मूर्ति पर पड़ती थीं।

गुजरात के मोढ़ेरा का सूर्य मंदिर
अहमदाबाद से सौ किमी दूर पुष्पावती नदी के तट पर है मोढ़ेरा का विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर। इस मंदिर का निर्माण सम्राट भीमदेव सोलंकी प्रथम (ईसा पूर्व 1022-1063 में) ने करवाया था। गजनी के आक्रमण के बाद सोलंकी साम्राज्य की राजधानी कही जाने वाली ‘अहिलवाड़ पाटण’ अपनी महिमा, गौरव और वैभव को खोती जा रही थी। राज्य के वैभव को पुन: बहाल करने के लिए सोलंकी राज परिवार और व्यापारी एकजुट हुए और उन्होंने संयुक्त रूप से भव्य मंदिरों के निर्माण के लिए अपना योगदान देना शुरू किया। सोलंकी सूर्यवंशी थे, और वे सूर्य को कुलदेवता के रूप में पूजते थे। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके निर्माण में कहीं भी चूने का उपयोग नहीं किया गया है।

उत्तराखंड का सूर्य मंदिर
कटारमल सूर्य मंदिर उत्तराखण्ड में अल्मोड़ा के कटारमल नामक स्थान पर स्थित है। यह सूर्य मंदिर न सिर्फ़ समूचे कुमाऊं मंडल का सबसे विशाल, ऊंचा और अनूठा मंदिर है, बल्कि ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर के बाद एकमात्र प्राचीन सूर्य मंदिर भी है। भारतीय पुरातत्त्व विभाग द्वारा इस मंदिर को संरक्षित स्मारक घोषित किया जा चुका है। मंदिर नौवीं या ग्यारहवीं शताब्दी में निर्मित हुआ माना जाता है। इस सूर्य मंदिर को बड़ आदित्य सूर्य मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर में भगवान आदित्य की मूर्ति किसी पत्थर अथवा धातु की नहीं बल्कि बरगद की लकड़ी से बनी है। मंदिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार भी नक्काशी की हुई लकड़ी का ही था, जो इस समय दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय की दीर्घा में रखा हुआ है।

राजस्थान का सूर्य मंदिर
झालावाड़ का दूसरा जुड़वा शहर झालरापाटन को सिटी ऑफ वेल्स यानी घाटियों का शहर भी कहा जाता है। शहर में मध्य स्थित सूर्य मंदिर झालरापाटन का प्रमुख दर्शनीय स्थल है। वास्तुकला की दृष्टि से भी यह मंदिर बेहद अहम है। इसका निर्माण 10वीं शताब्दी में मालवा के परमार वंशीय राजाओं ने करवाया था। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा भी विराजमान है। इसे पद्मनाभ मंदिर भी कहा जाता है। इसके अलावा उदयपुर से करीब 98 किलोमीटर दूर रणकपुर में नागर शैली में सफेद संगमरमर से बना सूर्य मंदिर है। जो कि भारतीय वास्तुकला का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करता है।

उत्तर प्रदेश का सूर्य मंदिर

  1. उत्तर प्रदॆश के महोबा का सूर्य मंदिर राहिला सागर के पश्चिम दिशा में स्थित है। इस मंदिर का निर्माण चंदेल शासक राहिल देव वर्मन ने एक तालाब को खुदवाकर किया था। इस तालाब को राहिला सागर के नाम से जाना जाता है। इसे 890 से 910 ई. के दौरान 9वीं शताब्दी में बनवाया गया था। इस मंदिर की वास्तुकला काफी खूबसूरत है। इस मंदिर को 1203 में कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारी नुकसान पहुंचाया।
  2. उत्तर प्रदेश में इलाहबाद से करीब 42 किलोमीटर दूर प्रतापगढ़ में सूर्य मंदिर है। पुरातत्व विज्ञानियों का मानना है कि ये मंदिर 8वीं-9वीं शताब्दी में बना था। लोक मान्यता है कि मुसलमान शासकों ने मंदिर को तोड़ दिया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की प्रथम सर्वेयर जनरल अलेक्जेंडर कनिंघम ने सूर्य मंदिर तथा तुषारण विहार को देखा था। मंदिर पर बेल और पत्तों के साथ ही देवताओं के चित्र खुदे हैं। मंदिर के ऊपर एक विशाल शिवलिंग है। जिसकी चौड़ाई करीब 4 फुट तथा लम्बाई 7 फुट है। शिवलिंग के उत्तर की ओर काले पत्थर में सूर्य देवता की मूर्ति खुदी है। मूर्ति क एक हाथ में चक्र, पुष्प और शंख है और दूसरा हाथ आशीर्वाद की स्थिति में है।


Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
According to the Bhavishya Purana, one of the Sun temples built by Sambha, son of Shri Krishna, is the Vaivaswan Temple of Konark.


from Dainik Bhaskar https://ift.tt/31S9eEC

No comments