1 नवंबर से डिजिटल ट्रांजेक्शन पर नहीं लगेगा अतिरिक्त चार्ज
यूटिलिटी डेस्क. डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स से कहा है कि वह 1 नवंबर से डिजिटल ट्रांजेक्शन के लिए ग्राहकों या कारोबारियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त चार्ज या मर्चेंट डिस्काउंट रेट न लगाएं। सरकार के इस से आदेश से 50 करोड़ रुपए तक के सालाना टर्नओवर वाले कारोबारियों को फायदा होगा। इन्हें बैंकों की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त चार्ज की भरपाई के लिए ग्राहकों से वसूली नहीं करनी होगी। उल्लेखनीय है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में 50 करोड़ तक के डिजिटल भुगतान पर इस अतिरिक्त चार्ज खत्म करने को कहा था।
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अभी बैंकों की ओर से बड़े ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की मद में कारोबारियों पर अतिरिक्त चार्ज लगाया जा रहा है। कई मामलों में यह चार्ज दो फीसदी तक होता है।
- अपने नुकसान से बचने के लिए कारोबारी इस अतिरिक्त चार्ज को ग्राहकों से वसूल रहे हैं। ऐसे में ग्राहक डिजिटल ट्रांजेक्शन से बच रहे हैं।
- यह अतिरिक्त चार्ज खासतौर पर क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान पर वसूला जा रहा है। जबकि गूगल-पे, फोन-पे जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भुगतान करने पर कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जा रहा है।
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में 50 करोड़ रुपए तक के सालाना कारोबारियों को किए जाने वाले डिजिटल भुगतान पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज को खत्म करने का ऐलान किया था।
- वित्त मंत्री ने कहा था कि इस डिजिटल ट्रांजेक्शन पर आने वाली लागत का बोझ भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और बैंक लेंगे। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट 2007 में संशोधन किया गया है।
- यह नए नियम 1 नवंबर 2019 से प्रभावी हो जाएंगे। सीबीडीटी ने उन सभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम्स से आवेदन मांगे हैं जो सरकारी नियमों के अनुसार अपने पेमेंट सिस्टम को डिजिटल भुगतान के लिए उपलब्ध कराने के इच्छुक हैं।
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