गंगा या उसकी सहायक नदियों में मूर्ति विसर्जन करने पर लगेगा 50 हजार का जुर्माना
यूटिलिटी डेस्क.केंद्र ने 11 राज्यों को निर्देश जारी कर गंगा और उसकी सहायक नदियों में मूर्ति विसर्जन पर पाबंदी लगाने को कहा है। इन राज्यों से दशहरा, दिवाली, छठ और सरस्वती पूजा जैसे त्योहारों पर गंगा या उसकी सहायक नदियों में मूर्ति विसर्जन करने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाने को कहा गया है। केंद्र सरकार के नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) की ओर से राज्यों को 15 सूत्री दिशा-निर्देश जारी किया है। राज्य सरकारों से मूर्ति विसर्जन वाली नदियों के सभी घाटों को बंद करने का निर्देश दिया गया है। बता दें कि केंद्र के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर वसूला गया जुर्माना राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास जमा कराया जाएगा।
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केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों से गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे अस्थायी तलाबों बनाने को कहा है, जहां भक्त मूर्ति विसर्जन कर सकें। साथ ही राज्य प्राधिकरण, बोर्ड और निगम को निर्देश दिया है कि मूर्तियां केवल सिंथेटिक मैटेरियल, नॉन-बायोडिग्रेडेबल मैटेरियल, प्लास्टर ऑफ पेरिस, पकी हुई मिट्टी, फाइबर और थर्माकोल से बनाई जाएं।
- सभी राज्य मूर्तियों को रंगने में इस्तेमाल होने वाले जहरीले पेंट्स, नॉन-बायोडिग्रेडेबल केमिकल डाई या सिंथेटिक पेंट के इस्तेमाल रोक लगाने को कहा है। राज्यों के मुख्य सचिव को हर त्योहार के बाद एक्शन टास्क रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट तैयार करने के लिए राज्य सरकारों को सात दिन का वक्त दिया गया।
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केंद्र सरकार की तरफ से भेजा गया निर्देश, उन राज्यों पर लागू होगा, जहां से गंगा और उसकी सहायक नदियां गुजरती हैं। इसमें उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड, पश्चिम बंगाल, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।
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गंगा नदी के दोनों ओर कुल 10 नदियां हैं। इसके बाएं ओर रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंद जैसी नदियां बहती है। वहीं दायीं ओर यमुना, तमसा, सोन, और पुनपुन नदी बहती है।
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साल 2014 में केंद्र सरकार ‘नमामि गंगे प्रोजेक्ट’ लेकर आई थी।इस प्रोजेक्ट के तहत 20,000 करोड़ रुपए गंगा साफपर खर्च किए गए। वहीं साल 2017 में ग्रीन ट्रिब्युनल यानी कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंगा में सभी तरह के अपशिष्ट पदार्थों के प्रवाह पर रोक लगा दी थी।
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