पति-पत्नी के रिश्ते के लिए जरूरी है साथ और पारदर्शिता जैसी बातें
जीवन मंत्र डेस्क. करवा चौथ का त्योहार पति-पत्नी के रिश्ते की प्रगाढ़ता को दिखाता है। इस व्रत की विधि और परंपराओं में कुछ ऐसी बातें छिपी हैं, जिन्हें मनोवैज्ञानिक और व्यवहारिक रुप से देखें तो उसमें दाम्पत्य जीवन के कुछ खास सूत्र समझ में आते हैं। इन परंपराओं के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं, लेकिन अगर इन्हें व्यवहारिक नजरिए से देखा जाए तो ये परंपराएं रिश्तों के बारे में 3 बारिकियों को समझाती हैं। अगर करवा चौथ के व्रत को धार्मिक तरीके से मनाने के साथ ही इस व्यवहारिक पक्ष को भी समझा जाए तो ये दाम्पत्य को नई ऊंचाई दे सकता है।
- रिश्ता जो रोशन करे
चांद की पूजा संकेत करती है कि जीवन की परेशानियों के अंधेरे में पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए रोशनी का काम करें। जिस तरह रात के अंधेरे में चंद्रमा रोशनी देता है। वैसे ही जीवन की परेशानियों में पति-पत्नी एक दूसरे के लिए राह दिखाने का काम करें।
- छलनी सीखाती है पारदर्शिता
छलनी से पति को देखना सिखाता है कि रिश्ते में एक-दूसरे के लिए इतनी पारदर्शिता होनी चाहिए कि आसानी से एक दूसरे के जीवन और बातों को समझ सकें। रिश्तों में पारदर्शिता नहीं होने से वे गलतफहमियों के शिकार हो जाते हैं।
- करवा और उसका पानी
करवा और उसका पानी कहता है कि करवा संस्कार और पानी भावनाओं का प्रतीक है। दाम्पत्य और परिवार को एकजुट रखने में संस्कार और प्रेम ही सबसे प्रमुख हैं। अगर घर में संस्कार और प्रेम ना हो तो उसे एक नहीं रखा जा सकता है।
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