रैगुलर इनकम के लिए विवाहित महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी में निवेश करना जरूरी
यूटिलिटी डेस्क. प्रॉपर्टी में निवेश करना पारंपरिक रूप से पुरुषों का काम माना जाता रहा है। इसका मुख्य कारण पहलेमहिलाओं के पास करियर के या बिजनेस के अवसर न होना रहा। लेकिन अब उन्हें ये अवसर मिल रहे हैं। वे अब बचत करती हैं, निवेश करती हैं और पैसों से जुड़े अन्य जरूरी फैसले भी लेती हैं। पिछले कुछ समय में महिलाओं ने रियल एस्टेट में निवेश करना शुरू किया है क्योंकि यह निवेश के सबसे सुरक्षित और फायदे वाले विकल्पों में से एक है। इससे महिलाओं को रैगुलर इनकम तो होती ही है साथ मेंटैक्स के फायदे भी मिलते हैं। इसलिए विवाहित महिलाओं के लिए इसमें निवेश करना और भी जरूरी हो जाता है।
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अगर घर पत्नी और पति दोनों के नाम पर है और वे खुद उस घर में रहते हैं तो होम लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर टैक्स में छूट मिलती है। अगर आय के अलग-अलग स्रोत हैं और अलग-अलग रिटर्न भरते हैं तो पति और पत्नी, दोनों ही सेक्शन 24 के तहत 2 लाख तक ही छूट पा सकते हैं। प्रिंसिपल एमाउंट के पेमेंट, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज पर भी टैक्स में छूट मिलती है। यानी टैक्स की काफी बचत की जा सकती है।
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कई राज्यों ने प्रॉपर्टी खरीदने वाली महिलाओं के लिए कई तरह की स्कीम्स लॉन्च की हैं, जिनमें स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन पर छूट मिलती है। ऐसा महिलाओं को प्रॉप्रटी में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के लिए है। इसलिए जब भी प्रॉपर्टी खरीदें संबंधित राज्य की सभी योजनाओं की जानकारी जरूर लें।
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ज्यादातर हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां और बैंक महिलाओं को कम दरों पर होम लोन देते हैं। आमतौर पर बाकियों की तुलना में महिलाओं के लिए ब्याज दर 0.05 फीसदी तक कम होती है। यह सुनने में कम लग सकती है लेकिन जब बात 20 से 30 साल तक के लोन की हो तो 0.05 फीसदी भी बहुत बचत करवा सकता है। एक अन्य पहलू यह भी है कि लगातर गिरने के बाद वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में होम लोन की ब्याज दर बढ़ी है। चूंकि यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है, महिलाओं को प्रॉपर्टी में निवेश करने पर ज्यादा बचत होगी।
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प्रॉपर्टी में निवेश करना रैगुलर इनकम पाने का सबसे सुरक्षित माध्यम है। जैसे-जैसे परिवार बढ़ता है, बच्चों की पढ़ाई, कॉलेज, शादी वगैरह के लिए ज्यादा फंड की जरूरत होती है। प्रॉपर्टी किराये पर देने से इसकी पूर्ति की जा सकती है। आमतौर पर किराये में हर साल 5 से 10 फीसदी का इजाफा भी होता है।
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जीवन अनिश्चितताओं से भरा है। डिवोर्स रेट तेजी से बढ़ा है। आर्थिक जोखिम भी हैं। जैसे नौकरी का जाना। इन सभी से शादीशुदा महिला वित्तीय समस्या में फंस सकती है। प्रॉपर्टी में निवेश करना इससे बचा सकता है।
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जब प्रॉपर्टी में निवेश करें तो अपने लक्ष्य को लेकर स्पष्ट रहें। उदाहरण के लिए अगर प्रॉपर्टी खुद के इस्तेमाल के लिए ली जा रही है तो यह सुनिश्चित करें कि प्रॉपर्टी एक अच्छी लोकेशन पर हो और उसका फिजिकल और सोशल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हो। सभी सुविधाएं भी जरूरी हैं। अगर प्रॉपर्टी केवल निवेश के उद्देश्य से ले रही हैं तो ऐसे इलाके में लें जहां कीमतें ज्यादा बढ़ें और ज्यादा किराया भी मिले। बिल्डर की साख कैसी है, यह भी देखें, ताकि आगे जाकर कानूनी मामले में फंसने का जोखिम न हो।
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