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सरकार के उपायों के बाद कैपिटल गुड्स, केमिकल, इन्फ्रा में निवेश के बेहतर मौके

यूटिलिटी डेस्क. देश की आर्थिक गतिविधियों से सुस्ती को दूर भगाने के लिए सरकार ने पिछले कुछ समय में कई कदम उठाए हैं। हाल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाउसिंग और एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए राहत के उपायों की घोषणा की है। रिजर्व बैंक से सरकार को 1.75 लाख करोड़ रुपए की सरप्लस राशि मिली है।


साथ ही सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती कर उद्योग जगत को 1.45 लाख करोड़ रु. की राहत दी है। इससे नए निवेश को रफ्तार मिलेगी। कॉरपोरेट टैक्स की कटौती से शेयर बाजारों में मजबूत पॉजिटिव मोमेंटम बना है। भारतीय निवेशक फिलहाल सतर्कता के साथ आशावादी हैं। अर्थव्यवस्था में ग्रोथ के रिवाइवल के लिए एक्शन प्लान तैयार है। इसके तहत इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने पर 2 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स में निवेश हो सकता है। इनमें रेल-रोड-एयर कनेक्टेड ट्रांसपोर्टेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर, माल ढुलाई के लिए वाटरवेज, सिंचाई के लिए नदियों का जोड़ने, हवाई मार्ग जोड़ने जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं।


इसके अलावा शहरी और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और बिजली मुहैया कराने, सस्ते घर बनाने, स्मार्ट सिटीज बनाने, किसानों को सुरक्षा मुहैया कराने, हेल्थकेयर और सामाजिक कल्याण की योजनाओं पर खर्च भी शामिल हैं। आने वाले समय में ये क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। केमिकल, कैपिटल गुड्स, ऑटो और ऑटो एंसिलरी इंडस्ट्री के अलावा बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हें बड़ा लाभ मिल सकता है। भारतीय केमिकल सेक्टर की ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग में महज 5% की हिस्सेदारी है। लेकिन पिछले दो साल में इस क्षेत्र में भारी निवेश हो रहा है। इससे चीन द्वारा खाली किए गए मौकों को भुनाया जा सकता है। बैंकिंग सेक्टर में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं। एनबीएफसी और माइक्रो-लेंडर्स के उभरने से कर्ज लेने की रफ्तार बढ़ी है। 2017 में कर्ज 3.7 लाख करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 6.7 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यह जीडीपी के महज 3.5% के बराबर है।


ऑटो इंडस्ट्री के हालात में अब स्पष्ट सुधार हो रहा है
मजबूत बैलेंस शीट और कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद ऑटो कंपनियां सुस्ती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वे विस्तार योजनाओं में पूंजी निवेश करेंगी। इनकी आरएंडडी की गतिविधियों में तेजी आएगी। नए एमिशन नॉर्म और जैविक ईंधन के वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर ऑटो सेक्टर के लिए ग्रोथ के मुख्य कारक साबित होंगे।



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