कम जोखिम के लिए एसआईपी से डेट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं
यूटिलिटी डेस्क. सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेश के एक बड़े माध्यम के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इससे न सिर्फ म्यूचुअल फंड में निवेश का प्रवाह बढ़ा है, बल्कि लोगों में निवेश को लेकर अनुशासन भी बढ़ा है। एसआईपी के जरिये एक बड़ा हिस्सा इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में निवेश किया जा रहा है। कम जोखिम चाहने वाले लोग एसआईपी के माध्यम से डेट ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड में मासिक/तिमाही/छमाही आधार पर निवेश कर सकते हैं। वैभव शाह, हेड, प्रोडक्ट्स एंड मार्केटिंग, मिराई एसेट म्यूचुअल फंड्स बता रहे हैं इससे जुड़ी खास बातें...
एसआईपी के माध्यम से निवेश का फायदा यह होता है कि अलग-अलग ब्याज दर के परिदृश्य में बाजार के उतार-चढ़ाव के बारे में अंदाज लगाने की जरूरत नहीं होती है। डेट म्यूचुअल फंड में इक्विटी ओरिएंटेड फंड की तरह उतार-चढ़ाव नहीं आता है। खासकर ऐसे वक्त जब बाजार इंटरेस्ट रेट के मूवमेंट के आधार पर चल रहा हो। एसआईपी में मासिक/तिमाही/छमाही आधार पर नियमित निवेश करना होता है। ऐसे में कब निवेश करना चाहिए और कब इससे बाहर निकलना है, इस बात का महत्व नहीं रह जाता है। बाजार के उतार-चढ़ाव के हिसाब से म्यूचुअल फंड की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) घटती-बढ़ती रहती है। एसआईपी से निवेश लागत की एवरेजिंग की जा सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के एक विश्लेषण के मुताबिक 1 अप्रैल 2003 से 31 अगस्त 2019 तक शॉर्ट, मीडियम और मीडियम से लॉन्ग ड्यूरेशन फंड का रिटर्न देखें तो 1 साल, 3 साल और 5 साल की अवधि में इन फंड का औसत रिटर्न स्थिर रहा है।
यह बताता है कि एसआईपी के जरिये निवेश किया जाए तो डेट म्यूचुअल फंड में स्थिर रिटर्न की संभावना अधिक होती है। यदि आप डेट म्यूचुअल फंड में 3 साल से अधिक समय के लिए निवेश में रहते हैं तो यह टैक्स एफिशिएंट होते हैं। इन पर इंडेक्सेशन का बेनीफिट मिलता है। निवेशकों को डेट म्यूचुअल फंड में कम से कम 3 साल के लिए निवेश करना चाहिए।
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