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सूर्य को जल चढ़ाते समय बोलना चाहिए गायत्री मंत्र, इससे मन होता है शांत और बढ़ती है एकाग्रता

जीवन मंत्र डेस्क। शनिवार, 2 नवंबर की शाम और रविवार, 3 नवंबर की सुबह सूर्य को विशेष अर्घ्य दिया जाएगा। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर छठ पूजा उत्सव मनाया जाता है। इस उत्सव की शुरुआत 31 अक्टूबर से हो गई है और 3 नवंबर की सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ पूजा का व्रत पूरा हो जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए छठ पूजा पर सूर्य को प्रसन्न करने के लिए जल चढ़ाने की सही विधि...

सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। जल चढ़ाने के लिए तांबे के लोटे का ही उपयोग करना चाहिए, क्योंकि तांबा सूर्य की धातु है। जल में चावल, रोली, फूल पत्तियां (यदि गुलाब की हो तो सर्वश्रेष्ठ है) भी डाल लेना चाहिए।

इसके बाद जल चढ़ाते समय गायत्री मंत्र का जाप करें। गायत्री मंत्र - ऊँ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

सूर्य को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और एकाग्रता बढ़ती है। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए।
गायत्री मंत्र जाप के बाद सूर्यदेव के 12 नाम वाले मंत्र का जाप कर सकते हैं। ये है सूर्य के 12 नामों वाला मंत्र-
आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीद मम भास्कर, दिवाकर नमस्तुभ्यं, प्रभाकर नमोस्तुते।
सप्ताश्वरथमारूढ़ं प्रचंडं कश्यपात्मजम्, श्वेतपद्यधरं देव तं सूर्यप्रणाम्यहम्।।

सूर्य को रोज जल चढ़ाने से मिलते हैं स्वास्थ्य लाभ
सूर्य को अर्घ्य देते समय पानी की जो धारा जमीन पर गिरती है, उस धारा से सूर्यदेव के दर्शन करना चाहिए। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है। अर्घ्य देने के बाद जमीन पर गिरे पानी को अपने मस्तक पर लगाना चाहिए। सूर्य को जल चढ़ाने के सुबह जल्दी उठना चाहिए। जल्दी उठने से स्वास्थ्य ठीक रहता है। दिनभर काम करने के लिए समय ज्यादा मिलता है। जल चढ़ाने के लिए घर से बाहर जाना होता है। ऐसे में सुबह-सुबह के वातावरण का लाभ सेहत को मिलता है।



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