कमल के आसन पर विराजित महालक्ष्मी बताती हैं सुखी और सफल जीवन का सूत्र
जीवन मंत्र डेस्क। रविवार, 27 अक्टूबर को दीपावली है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर रात में देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि जो लोग दिवाली पर लक्ष्मी पूजन करते हैं, उनके घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कमल पर विराजित देवी लक्ष्मी की पूजा विशेष फल देने वाली मानी गई है। देवी लक्ष्मी के इस स्वरूप में सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हैं। जानिए देवी का ये स्वरूप क्या संदेश देता है...
- धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी को प्रसन्न करने का संदेश उन्हीं के चित्रों में छिपा हुआ है। महालक्ष्मी की तस्वीरों में और मूर्तियों में उन्हें कमल के पुष्प पर विराजित दर्शाया जाता है। इसके पीछे धार्मिक कारण के साथ ही जीवन प्रबंधन के सूत्र भी हैं।
- महालक्ष्मी धन की देवी हैं। धन के संबंध में कहा जाता है कि इसका नशा सबसे अधिक दुष्प्रभाव देने वाला होता है। धन मोह-माया में डालने वाला है और जब धन किसी व्यक्ति पर हावी हो जाता है तो अधिकांश परिस्थितियों में वह व्यक्ति बुराई के रास्ते पर चल देता है। इसके जाल में फंसने वाले व्यक्ति का पतन होना निश्चित है।
- कमल का फूल अपनी सुंदरता, निर्मलता और गुणों के लिए जाना जाता है। कमल कीचड़ में ही खिलता है, लेकिन ये फूल कीचड़ की गंदगी से अलग ही रहता है।
- कमल पर विराजित लक्ष्मी यही संदेश देती हैं कि वे उसी व्यक्ति पर कृपा बरसाती हैं जो कीचड़ जैसे समाज में भी कमल की तरह निष्पाप रहे और खुद पर बुराइयों को हावी ना होने दें।
- जिस व्यक्ति के पास अधिक धन है, उसे अधार्मिक कर्मों से बचना चाहिए। धनवान व्यक्ति को सहज रहना चाहिए, जिससे उस पर लक्ष्मी सदैव प्रसन्न रहे।
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