अपनी शर्तों पर 'सांड की आंख' करना चाहती थीं कंगना रनोट, मेकर्स नहीं मानें तो छोड़ दी थी फिल्म
बॉलीवुड डेस्क. फिल्म 'सांड की आंख' में युवा एक्ट्रेस तापसी पन्नू व भूमि पेडणेकर द्वारा बुजुर्ग शूटर दादियों के रोल करने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बहस का आगाज कंगना रनोट की बहन रंगोली ने किया था। उसके बाद नीना गुप्ता ने भी उनके सुर में सुर मिलाए थे। रंगोली के स्टेटमेंट से तिलमिलाए फिल्म के मेकर्स ने मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए कुछ बड़े खुलासे किए हैं और नाम न छापने की शर्त पर भास्कर को रंगोली के सवालों की असली वजह बताई है।
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मेकर्स का कहना है कि हकीकत में पहले शूटर दादियों का रोल कंगना को ही ऑफर हुआ था और वे इसे करने को राजी भी थीं। लेकिन वे कई शर्तें थोप रही थीं। पहले तो कंगना यह दबाव बना रही थीं कि दोनों दादियों के रोल को एक कर दिया जाए, ताकि दूसरी हीरोइन की गुंजाइश खत्म हो जाए और सिर्फ वे फिल्म में हर ओर नजर आएं। फिर उनका कहना था कि अगर एक एक्ट्रेस पर बात नहीं बनती तो फिल्म में उनका डबल रोल कर दिया जाए, ताकि शूटर दादियों चंद्रो और प्रकाशी तोमर दोनों के रोल वे ही कर सकें। इन शर्तों को न माने जाने पर उन्होंने यह फिल्म छोड़ दी थी।
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यह रोल कंगना को ऑफर हुआ था। उन्हें कहानी असरदार लगी थी, लेकिन उनका मानना था कि फिल्म को 50 साल से ऊपर की ही कोई हीरोइन करे तो ही अच्छा होगा। इसीलिए यह फिल्म उन्होंने नहीं की।
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सूत्रों की मानें तो ऐसे के रोल के जरिए कंगना अपनी एक्टिंग को और निखारना चाहती थीं। वे इससे पहले 80 साल की बुजुर्ग महिला के संघर्ष पर फिल्म 'तेजू' बनाना चाहती थीं, लेकिन वह डिले हो गई। दो साल बाद भी यह फिल्म फ्लोर पर नहीं जा पाई। नतीजतन, कंगना 'सांड की आंख' करना चाहती थीं, मगर ऐसा हो न सका।
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मेकर्स को कंगना के डबल रोल वाली बात एक हद तक जंची थी। क्योंकि 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में उनकी दोहरी भूमिका को पसंद किया गया था। लेकिन बाद में मेकर्स को लगा कि दोनों दादियां बेहद पॉपुलर हैं। दोनों की अपनी अलग पहचान है। ऐसे में, डबल रोल की गुंजाइश नहीं रही। नतीजतन, मेकर्स और कंगना के बीच बात नहीं बनी। फाइनली दादियों का रोल तापसी और भूमि को मिल गया।
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