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शरद पूर्णिमा की रात वृंदावन के निधिवन में श्रीकृष्ण गोपियों संग की थी रासलीला

जीवन मंत्र डेस्क। रविवार, 13 अक्टूबर को आश्विन मास की पूर्णिमा है। इसे शरद पूर्णिमा कहते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात में ही गोपियों के साथ रासलीला की थी। मान्यता है कि हर साल शरद पूर्णिमा की रात श्रीकृष्ण गोपियों के साथ वृंदावन के निधिवन में रासलीला रचाते हैं। वृंदावन उत्तर प्रदेश में मथुरा के पास ही स्थित है। ये क्षेत्र श्रीकृष्ण का सबसे प्रमुख तीर्थ स्थान है। यहां पहुंचने के लिए सभी बड़े शहरों से आवागमन के कई साधन आसानी से मिल जाते हैं।

  • गोपियां श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं

द्वापर युग में वृंदावन की सभी गोपियां श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं। जब गोपियों ने ये इच्छा श्रीकृष्ण को बताई तो भगवान ने ये कामना पूरी करने का वचन दिया। शरद पूर्णिमा की रात चंद्र अपनी 16 कलाओं के साथ दिखाई देता है, इस रात चंद्र बहुत सुंदर दिखाई देता है। इसीलिए श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात यमुना तट के पास निधिवन में गोपियों को मिलने के लिए कहा। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात सभी गोपियां निधिवन पहुंच गईं। उस समय निधिवन में जितनी गोपियां थीं, श्रीकृष्ण ने उतने ही रूप धारण किए और सभी गोपियों के साथ रास रचाया।

  • निधिवन में हैं तुलसी के पेड़

निधिवन में तुलसी के पेड़ हैं। ये सामान्य तुलसी के पौधों से एकदम अलग हैं। तुलसी के इन पेड़ों की शाखाएं जमीन की ओर आती हैं। यहां तुलसी के पेड़ जोड़ों में हैं। मान्यता है कि आज भी जब श्रीकृष्ण निधिवन में गोपियों संग रास रचाते हैं तो ये सभी पेड़ गोपियां बन जाती हैं। जैसे ही सुबह होती है तो फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं। सूर्यास्त के बाद इस वन को खाली करा दिया जाता है। किसी भी इंसान को इस वन में रुकने की इजाजत नहीं है। इस संबंध में माना जाता है कि अगर व्यक्ति रात में इस वन में रुकता है तो उसका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है।

  • निधिवन के रंगमहल की खास बातें

निधिवन में बने रंग महल में रोज रात को राधा-कृष्ण आते हैं, ऐसी मान्यता यहां प्रचलित है। रंग महल में राधा और श्रीकृष्ण के लिए रखे गए चंदन के पलंग को शाम सात बजे के पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास ही एक लोटा पानी, राधाजी के श्रृंगार का सामान, दातुन, पान रख दिया जाता है। सुबह जब रंग महल का द्वार खोला जाता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त मिलते हैं। खाली लोटा और उपयोग की हुई दातुन दिखाई देती है। पान भी खाया हुआ मिलता है। माना जाता है कि इन सभी चीजों का उपयोग श्रीकृष्ण और राधा द्वारा किया जाता है।



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