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कम बचत हो या ज्यादा खरीदारी, कई तरह की होती हैं आर्थिक बीमारियां

यूटिलिटी डेस्क. मौजूदा वक्त में युवाओं की कमाई काफी बढ़ी है, बावजूद इसके सेविंग घट गई है। इसकी बड़ी वजह है पैसों और कमाई को सही तरीके से मैनेज न कर पाना। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप 'मनी डिसॉर्डर' के शिकार हो सकते हैं। ऐसी कई आर्थिक बीमारियां हैं, जो युवाओं को और भी कमजोर बना रही हैं।

  1. इसमें युवा बहुत जरूरी चीजों में या क्रेडिट कार्ड का बिल भरने में पैसा खर्च नहीं करते। कहीं इन्वेस्ट नहीं करते और अपने बैंक में पैसे को बेकार पड़ा रहने देते हैं। टैक्स रिटर्न भरने तारीख आगे बढ़ाते रहते हैं और अपना पोर्टफोलियो मैनेज नहीं करते। अपने पैसे का सही इस्तेमाल न करना आर्थिक चिंता की निशानी हो सकता है।

  2. इस बीमारी में शामिल है जानबूझकर अपना सारा पैसा किसी को दे देना, जिसके चलते ज्यादा कमाई के बावजूद महीने के अंत में पैसों की तंगी बने रहना। इसके चलते जरूरी आर्थिक लक्ष्य पूरे नहीं हो पाते। ऐसे में चाहिए कि अपनी सैलरी अपने पति या पत्नी के हाथ में दें, जो उसे ठीक से इन्वेस्ट कर सके। या फिर अपने सारे पेमेंट्स को ऑटोमैटिक मोड पर रखें, जिससे अकाउंट में सैलरी आते ही वह सही जगह इन्वेस्ट हो जाए।

  3. कुछ लोग पैसा खर्च करना इतना फिजूल समझते हैं, कि पैसा होते हुए भी बेहद खराब तरीके से जिंदगी जी रहे हैं। इसमें जीने की परिस्थितियां इतनी खराब हो जाती हैं कि स्वयं और परिवार की बेसिक जरूरतों पर भी खर्च नहीं करते हैं।

  4. कई बार लोग ज्यादा और जल्दबाजी में खरीदारी करते हैं। उनमें इसे लेकर बेचैनी बनी रहती है और खरीदारी करने से आराम मिलता है। हालांकि जैसे ही आप शॉपिंग करके लौटते हैं, आप फिर से दुखी हो जाते हैं और यह प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती। ऐसे में किसी मनोवैज्ञानिक से बात करना जरूरी है।



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