राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 33 बीमारियों के अलावा अन्य रोगों का भी होगा मुफ्त इलाज
यूटिलिटी डेस्क. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत इलाज का दायरा बढ़ा दिया गया है, अभी सिर्फ 33 बीमारियां होने पर ही 18 साल तक के बच्चों को मुफ्त इलाज मिलता था। लेकिन अब अन्य रोग होने पर भी सुविधा मिलेगी। इसके लिए जिला स्तर पर ही राशि स्वीकृति के अधिकार कलेक्टर को दिए गए हैं। वह 2.50 लाख रुपए तक बीमारी के लिए स्वीकृत कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट ने हाल ही में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर यह व्यवस्था कराई है। इसके आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। हर साल बच्चों के इलाज पर 2 से 3 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाती है। निजी अस्पताल में इलाज मुफ्त मिलता है और भुगतान शासन द्वारा किया जाता है। अब बीमारियों का दायर बढ़ने से कई छोटे-छोटे रोग भी इसमें शामिल हो जाएंगे। इस कार्यक्रम से जुड़े अमले को भी प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वह यह समझ सकें कि किस रोग में कितनी राशि मिलेगी।
33 बीमारियां भी शामिल
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत बच्चों के ह्दय, जन्मजात मोतियाबिंद, मूकबधिर, कटे-फटे होंठ, आड़े-टेड़ पैर, कमर में गंभीर समस्या, दिमागी रोग सहित 33 बीमारियों पहले दायरे में थीं। इन रोग से जुड़े बच्चों को कैंपों के माध्यम से तलाशा जाता था और इनका इलाज कराया जा रहा है। जिले में हर साल 2 से 3 हजार बच्चों को योजना का लाभ मिला है। सत्र 2018-19 में ही 2245 बच्चों को कार्यक्रम के तहत इलाज मिला। सरकार ने 2.50 करोड़ रुपए खर्च किए। इस सत्र में 450 बच्चों को इलाज मिल चुका है।
कलेक्टर को ये अधिकार
कार्यक्रम के तहत रोगों का दायरा बढ़ा दिया गया है। 33 बीमारियां जो पहले से चिन्हित हैं, उनके अलावा जिन रोग में पैकेज स्वीकृत नहीं है। उसके लिए भी ढाई लाख तक की राशि स्वीकृति होगी। जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन के बाद स्थानीय स्तर पर ही इसकी स्वीकृति प्राप्त की जा सकती है। कलेक्टर को यह राशि स्वीकृत करने के अधिकार होंगे। इसके अलावा नई प्रावधान यह किया है कि हितग्राही की मृत्यु की दशा में अस्पताल के माध्यम से परिवहन के लिए वित्तीय सहयोग परिजनों को मिलेगा।
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