बुरी सलाह से राजा खत्म हो जाता है, अहंकार से गुण और नशा करने से शर्म नष्ट हो जाती है
जीवन मंत्र डेस्क। श्रीरामचरित मानस में श्रीराम और रावण की कथा के माध्यम से सुखी और जीवन के सूत्र बताए गए हैं। इस ग्रंथ की नीतियों का पालन करने पर हम कई बाधाओं से बच सकते हैं। अरण्य कांड में शूर्पणखा और रावण का प्रसंग है, इसमें बताया गया है कि किन कारणों से कोई नष्ट हो सकता है। जानिए ये प्रसंग...
- रावण की बहन का नाम शूर्पणखा ऐसे पड़ा
शूर्पणखा रावण की बहन थी। उसके नाखूने सूपे की तरह थे, इसी वजह से उसका नाम शूर्पणखा पड़ा। शूर्पणखा के पति का नाम विद्युतजिव्ह था। वो कालकेय नाम के राजा का सेनापति था। रावण जब विश्वयुद्ध पर निकला तो कालकेय से भी उसका युद्ध हुआ। उस युद्ध में रावण ने विद्युतजिव्ह का भी वध कर दिया। तब शूर्पणखा ने रावण को श्राप दिया था कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा।
- शूर्पणखा और रावण का प्रसंग
श्रीरामचरितमानस के अरण्य कांड में लक्ष्मण ने शूर्पणखा के नाक, कान काट दिए थे। इसके बाद वह रावण के पास जाती है और राम-लक्ष्मण से बदला लेने के लिए कहती है। इस दौरान शूर्पणखा रावण से कहती है कि किन अवगुणों से संन्यासी, पराक्रमी राजा और गुणवान व्यक्ति नष्ट हो जाते हैं।
शूर्पणखा कहती है कि- संग तें जती कुमंत्र ते राजा। मान ते ग्यान पान तें लाजा।।
प्रीति प्रनय बिनु मद ते गुनी। नासहिं बेगि नीति अस सुनी।।
इस चौपाई का अर्थ यह है कि विषयों के संग यानी वासना और लोभ की वजह से संन्यासी, मंत्रियों की बुरी सलाह से पराक्रमी राजा संकट में फंस सकता है, नष्ट हो सकता है, मान से ज्ञान, मदिरापान यानी नशे से शर्म खत्म हो जाती है, नम्रता के बिना प्रेम और अहंकार से गुणवान व्यक्ति भी नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार की नीति मैंने सुनी है।
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