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मत्स्य द्वादशी आज, कैसे करें ये व्रत इसकी पूजा विधि, महत्व और कथा

जीवन मंत्र डेस्क. डेस्क. हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मत्स्य द्वादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु जी ने मत्स्य रूप धारण कर दैत्य हयग्रीव का वध कर वेदो की रक्षा की थी। इस कारण इस तिथि पर भगवान विष्णु जी के मत्स्य अवतार की पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विष्णु की पूजा करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। इस वर्ष सोमवार 9 दिसंबर 2019 को मत्स्य द्वादशी मनाई जाएगी।

व्रत कथा और पूजन विधि

  • मत्स्य अवतार की कथा

सनातन धर्म के धार्मिक ग्रंथो के अनुसार एक बार ब्रह्मा जी की असावधानी से दैत्य हयग्रीव ने वेदो को चुरा लिया। हयग्रीव द्वारा वेदों को चुरा लेने के कारण ज्ञान लुप्त हो गया। समस्त लोक में अज्ञानता का अंधकार फ़ैल गया। तब भगवान विष्णु जी ने धर्म की रक्षा के लिए मत्स्य अवतार धारण कर दैत्य हयग्रीव का वध किया और वेदो की रक्षा की तथा भगवान ब्रह्मा जी को वेद सौप दिया।

  • मत्स्य अवतार का महत्व

भगवान विष्णु जी के 12 अवतार में प्रथम अवतार मत्स्य अवतार है। मत्स्य द्वादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी भक्तो के संकट दूर करते है तथा भक्तों के सब कार्य सिद्ध करते हैं।

  • पूजा विधि
  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करके इस दिन भगवान श्री हरी विष्णु जी के नाम से उपवास रख पूजा-अर्चना व आराधना करना चाहिए। पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
  2. मंत्र: ॐ मत्स्यरूपाय नमः॥ इस मंत्र का जाप करें।
  3. मत्स्य द्वादशी के दिन जलाशय या नदियों में मछली को चारा डालना चाहिए।


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Matsya Dwadashi today, how to observe this fast, its worship method, importance and story


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