
जीवन मंत्र डेस्क। संत कबीर अंधविश्वास और सामाजिक बुराइयों की आलोचना करते थे। उन्होंने दोहों के माध्यम से सुखी और सफल जीवन के सूत्र बताए हैं। संत कबीर के अनुयायियों की संख्या काफी अधिक है। कबीर के दोहे काफी प्रसिद्ध हैं, इनमें छिपे सूत्रों को अपनाने से हमारी हर बाधा दूर हो सकती है। जानिए संत कबीर के कुछ खास दोहे...
- धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय। माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय॥
अर्थ- इस दोहे में कबीरदास कहते हैं कि हमें हर काम में धैर्य रखना चाहिए। किसी भी काम का फल तुरंत नहीं मिलता है। अगर कोई माली किसी पौधे में एक साथ सौ घड़े पानी डाल देगा, तभी भी उसमें फल तो समय आने पर ही लगेंगे। इसीलिए हमें धैर्य रखें।
- साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुंब समाय। मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय॥
अर्थ- कबीर कहते हैं कि भगवान मुझ पर इतनी कृपा करें कि मेरा परिवार सुखी रहे और कोई भी भूखा न रहे। मेरे घर आने वाला साधु भी भूखा न जाए।
- कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और। हरि रुठे गुरु ठौर है, गुरु रुठे नहीं ठौर॥
अर्थ- इस दोहे में गुरु की महिमा बताई गई है। कबीर के अनुसार इंसान अंधा है, उसे कुछ भी जानकारी नहीं है। सब कुछ गुरु ही बताता है। अगर कभी भगवान रुठ जाए तो गुरु भगवान को मनाने का उपाय बताता है। अगर गुरु ही रुठ जाए तो हमारी मदद कोई नहीं करता है।
- माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर। आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर।
अर्थ- इस दोहे में कबीर कहते हैं कि इंसान की इच्छाएं कभी नहीं मरती है, चाहे उसकी मृत्यु हो जाए। सुख पाने की आशाएं हमेशा हमारे मन में रहती हैं।
- दुख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय। जो सुख में सुमिरन करे दुख काहे को होय।
अर्थ- कबीर इस दोहे में कहते हैं कि जीवन में जब दुख आता है, हम तभी भगवान को याद करते हैं। सुख के दिनों में कोई भी भगवान का ध्यान नहीं करता। अगर सुख के दिनों में भी भगवान को याद किया जाए तो हमें किसी तरह के दुख का सामना नहीं करना पड़ता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2Lm9cNx
No comments