जैसे हम हैं, वैसे ही हमारे विचार हो जाते हैं और हम दूसरों को भी वैसा ही समझने लगते हैं
- यात्री ने दुखी होते हुए कहा कि बाबा, मैं जिस गांव से आ रहा हूं, वहां के लोग बहुत बुरे हैं, उन लोगों ने कभी भी मेरी मदद नहीं की। गांव के लोग हमेशा मुझे भला-बुरा कहते हैं। इसीलिए मैं वो गांव छोड़कर यहां आ गया हूं।
- वृद्ध व्यक्ति ने कहा कि इस गांव के लोग भी बहुत बुरे हैं, यहां भी कोई मदद करने वाला नहीं है। ये बात सुनकर वह यात्री दूसरे गांव की ओर निकल गया।
- कुछ देर बाद एक और यात्री उसी गांव में आया और उसी वृद्ध से पूछा कि इस गांव के लोग कैसे हैं? क्या यहां के लोग दूसरों की मदद करते हैं? वृद्ध ने उससे पूछा कि तुम जिस गांव में रहते हो, वहां के लोग कैसे हैं?
- दूसरे यात्री ने खुश होकर कहा कि मैं जहां से आया हूं, वहां के लोग बहुत अच्छे हैं। हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहते हैं। मैं रोजगार की तलाश में इस गांव में आया हूं। ये सुनकर वृद्ध ने कहा कि इस गांव के लोग भी बहुत अच्छे, सभी दूसरों की मदद करते हैं। ये सुनकर दूसरा यात्री उसी गांव में रुक गया।
इस छोटी सी कथा सीख यह है कि हर इंसान में अच्छाइयां और बुराइयां होती हैं, लेकिन जो लोग दूसरों में सिर्फ बुराइयां खोजते हैं, वे कभी सुखी नहीं रह पाते हैं। ऐसे लोगों को कहीं भी मान-सम्मान नहीं मिलता। नकारात्मक विचारों की वजह से व्यक्ति का व्यक्तित्व भी नकारात्मक हो जाता है। ऐसे विचारों से बचना चाहिए। हमेशा लोगों की अच्छाइयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। सकारात्मक रहेंगे तो हर जगह मान-सम्मान और सफलता मिल सकती है।
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