मकर संक्रांति पर सूर्य को जल चढ़ाकर बोलना चाहिए सूर्य मंत्र स्तुति, पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा
जीवन मंत्र डेस्क. बुधवार, 15 जनवरी को मकर संक्रांति है। ये सूर्य पूजा का पर्व है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाने की परंपरा है। स्नान के बाद जरूरतमंदों को सूर्य से संबंधित चीजें दान करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार कुंडली में सूर्य की शुभ-अशुभ स्थिति का अच्छा या बुरा असर हमारी बुद्धि पर और मान-सम्मान पर होता है। सूर्य की शुभ स्थिति समाज में मान-सम्मान भी दिलवाती है। सूर्य पूजा से स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं। जानिए मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए...
- स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। इसके लिए तांबे के लोटे में जल भरें। जल में चावल, लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य चढ़ाएं। जल चढ़ाने के बाद सूर्य मंत्र स्तुति का पाठ करें। इस पाठ के साथ शक्ति, बुद्धि, स्वास्थ्य और सम्मान की कामना से करें।
सूर्य मंत्र स्तुति
नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्। दिवाकरं रविं भानुं मार्तण्डं भास्करं भगम्।।
इन्द्रं विष्णुं हरिं हंसमर्कं लोकगुरुं विभुम्। त्रिनेत्रं त्र्यक्षरं त्र्यङ्गं त्रिमूर्तिं त्रिगतिं शुभम्।।
- इस प्रकार सूर्य की आराधना करने के बाद धूप, दीप से सूर्य देव का पूजन करें।
- सूर्य से संबंधित चीजें जैसे तांबे का बर्तन, पीले या लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, माणिक्य, लाल चंदन आदि का दान करें। अपनी श्रद्धानुसार इन चीजों में से किसी भी चीज का दान किया जा सकता है। सूर्य के निमित्त व्रत करें। एक समय फलाहार करें और सूर्यदेव का पूजन करें।
इस पर्व को क्यों कहते हैं मकर संक्रांति
पं. शर्मा के अनुसार सूर्य जब धनु से मकर राशि में प्रवेश करता है तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं। सूर्य के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। मकर संक्रांति के बाद ही सूर्य की स्थिति बदलती है। सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन हो जाता है। महाभारत में भीष्म पितामह ने उत्तरायन पर ही अपने प्राण त्यागे थे। इस दिन से देवताओं के दिन शुरू हो जाते हैं। इसीलिए इस पर्व का महत्व काफी अधिक माना गया है।
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