यूटिलिटी डेस्क. जब किसी व्यक्ति के वाहन से दुर्घटना हो जाती है तो सामने वाला पक्ष जिसका नुकसान हुआ है, वह हर्जाना वसूलने के लिए कोर्ट में आपके खिलाफ मामला दर्ज कराता है। सबूतों के आधार पर कोर्ट में मुआवजा राशि तय होती है। ऐसी स्थिति में थर्ड पार्टी व्हीकल इंश्योरेंस आपके काम आता है। लेकिन याद रखें, इंश्योरेंस कंपनी अधिकतम 7 लाख 50 हजार रुपए तक का ही मुआवजा दे सकती है। इससे अधिक राशि हुई तो बाकी आपको अपनी जेब से देनी पड़ेगी। हालांकि, मृत्यु या गंभीर चोट के मामले में मुआवजे की सीमा तय नहीं है। ऐसे मामले में जितना कोर्ट तय करे, उतना इंश्योरेंस कंपनी देने के लिए मजबूर होती है। नुकसान के मुआवजे का दावा एक बार से ज्यादा नहीं किया जा सकता।
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