3 मार्च से होलाष्टक, इसी तिथि से हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को यातनाएं देना शुरू की थीं
जीवन मंत्र डेस्क. मंगलवार, 3 मार्च से होलाष्टक शुरू हो रहे हैं। इस साल होलाष्टक आठ नहीं सात दिन के रहेंगे। इन दिनों में शुभ कर्म करना वर्जित रहता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार होलाष्टक के समय में सभी ग्रह अशुभ स्थिति में रहते हैं, इस वजह से अभी शुभ काम करने से बचना चाहिए। इस संबंध में एक अन्य मान्यता ये है कि हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रहलाद को यातनाएं देना शुरू की थी और पूर्णिमा तिथि पर होलिका के साथ अग्नि में बैठा दिया था। होली से पूर्व आठ दिनों तक भक्त प्रहलाद ने यातनाएं सहन की थी, इस वजह से होलाष्टक में शुभ काम करने के लिए मना किया जाता है। सोमवार, 9 मार्च को होलिका दहन है और मंगलवार, 10 मार्च को होली खेली जाएगी।
ये है प्रहलाद और होलिका की कथा
प्राचीन समय में असुर हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी को प्रसन्न करने के तपस्या की थी। इससे प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने असुरराज को वरदान दिया था। वरदान के प्रभाव से हिरण्यकश्यप अजय हो गया था। उसने देवताओं को पराजित कर दिया और तीनों लोकों पर अत्याचार शुरू कर दिया था। तब भगवान विष्णु ने भक्तों के कल्याण के लिए अपने अंश प्रहलाद को असुरराज की पत्नी कयाधु के गर्भ में भेज दिया। भक्त प्रहलाद विष्णु भक्ति करता था। जिससे हिरण्यकश्यप उसे शत्रु समझने लगा था। अपने पुत्र को खत्म करने के लिए असुरराज ने फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से यातनाएं देना शुरू कर दी थीं।
भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रहलाद पर इन सभी यातनाओं का कोई असर नहीं हुआ। तब हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर अपनी होलिका के साथ प्रहलाद को अग्नि में जलाने की योजना बनाई। होलिका को वरदान प्राप्त था कि उसे अग्नि जला नहीं सकेगी। योजना के अनुसार हिरण्यकश्यप में आग जलाने की व्यवस्था की और प्रहलाद को होलिका की गोद में बैठाकर आग जला दी। इस यातना से भी भक्त प्रहलाद को कुछ नहीं हुआ और होलिका स्वयं इस अग्नि में जल गई। तभी से इस तिथि पर होली मनाई जाती है और इससे पहले आठ दिनों तक होलाष्टक रहता है, क्योंकि इन दिनों में प्रहलाद को यातनाएं दी गई थीं।
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