नवरात्रि, शनिवार और चतुर्थी के योग में गणेशजी और माताजी के साथ ही करें शनि पूजा
ये है विनायकी चतुर्थी
हिन्दी पंचांग में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायकी चतुर्थी कहते हैं। गणेशजी इस तिथि के स्वामी हैं। इस दिन गणेशजी के लिए व्रत-उपवास और पूजा-पाठ करने से सुख-समृद्धि, ज्ञान और बुद्धि बढ़ती है। विनायकी चतुर्थी पर सुबह जल्दी उठें, स्नान के बाद लाल वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। घर के मंदिर में गणेश प्रतिमा स्थापित करें। सिंदूर, दूर्वा, फूल, चावल, फल, प्रसाद चढ़ाएं। दीपक जलाएं। व्रत में फलाहार, पानी, दूध, फलों का रस आदि चीजों का सेवन किया जा सकता है। पूजा में गणेशजी के 12 नाम मंत्रों का जाप कम से कम 108 बार करें। 12 नाम मंत्र - ऊँ सुमुखाय नम:, ऊँ एकदंताय नम:, ऊँ कपिलाय नम:, ऊँ गजकर्णाय नम:, ऊँ लंबोदराय नम:, ऊँ विकटाय नम:, ऊँ विघ्ननाशाय नम:, ऊँ विनायकाय नम:, ऊँ धूम्रकेतवे नम:, ऊँ गणाध्यक्षाय नम:, ऊँ भालचंद्राय नम:, ऊँ गजाननाय नम:।
देवी दुर्गा को लाल चीजें चढ़ाएं
इस तिथि पर गणेश पूजा के देवी दुर्गा की पूजा करें। पूजा में देवी को लाल चीजें जैसे लाल चुनरी, लाल फूल, लाल चूड़ियां अर्पित करें। देवी मां को फलों का भोग लगाएं और दुं दुर्गायै नम: मंत्र का जाप करें।
शनिदेव को चढ़ाएं नीले फूल
शनिवार और चतुर्थी के योग में शनि को तेल चढ़ाएं, ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें। अपराजिता के नीले फूल शनि को चढ़ाएं।
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